कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान का एलान किया है। पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक एक महीने का विशेष अभियान चलाएगी, जिसका उद्देश्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जाने के मुद्दे को उठाना है। इस अभियान के तहत, पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर उन लाखों नामों को फिर से सूचीबद्ध कराने का प्रयास करेंगे जो कथित तौर पर अनुचित तरीके से हटा दिए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह मतदाताओं के वोट देने के अधिकार का हनन है और चुनाव प्रक्रिया में धांधली का प्रयास है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक महीने का कार्यक्रम होगा, जिसमें पार्टी का पूरा संगठन सक्रिय रूप से शामिल होगा। कार्यकर्ताओं का मुख्य काम घर-घर जाकर उन करीब 13.5 करोड़ नामों को एकत्रित करना और उजागर करना होगा जिन्हें चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से काट दिया है। इन नामों को सूची में वापस लाने के लिए हर बूथ स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। यह अभियान छह राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा, जहां बूथ स्तर पर मतदाताओं के नामों को हटाए जाने की जानकारी पार्टी के पास उपलब्ध है। जयराम रमेश ने बताया कि देश में लगभग 10 लाख बूथ हैं, जिनमें करीब 13 से 13.5 करोड़ नाम शामिल हैं। कांग्रेस का दावा है कि इन नामों को बिना किसी उचित प्रक्रिया का पालन किए बड़े पैमाने पर और अंधाधुंध तरीके से हटाया जा रहा है, जो कि गैरकानूनी और लापरवाह रवैया दर्शाता है। अभियान का समापन 1 नवंबर को रामलीला मैदान, दिल्ली में एक विशाल महारैली के साथ होगा। इस रैली के लिए सभी गठबंधन और विपक्षी पार्टियों को निमंत्रण भेजा जा रहा है। इस महारैली का उद्देश्य वोट बचाओ, देश बचाओ और चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को बुलंद करना है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम लोकतंत्र की नींव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और जनता का भरोसा बहाल करने का एक असाधारण अवसर प्रदान करेगा। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने कहा कि सीईसी ने न केवल झूठ बोला है, बल्कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इशारे पर कानून का उल्लंघन भी किया है और संविधान की भावना के साथ विश्वासघात किया है। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल से भी पोस्ट किया गया कि वोट देने के अधिकार को गैरकानूनी तरीके से छीनना देश विरोधी काम है और ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया है। जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगा है, हालांकि फिलहाल कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास इस महत्वपूर्ण संस्था में जनता का भरोसा बहाल करने का एक असाधारण अवसर है, जिसकी साख पहले के चुनाव आयुक्तों द्वारा स्थापित की गई थी। कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर भरोसा किया है, लेकिन यह भरोसा महान सुकुमार सेन जैसे पहले सीईसी द्वारा स्थापित मर्यादित और सक्षम कामकाज पर आधारित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार उस विरासत से बनी साख का दावा नहीं कर सकते। फॉर्म 6 में कथित दुर्भावनापूर्ण बदलाव, जिसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने का संकेत दिया गया था, सीईसी के छलपूर्ण आचरण का एक गंभीर उदाहरण है। इस अभियान के तहत, 25 और 26 नवंबर को छह अलग-अलग जगहों से 'दिल्ली चलो यात्रा' की शुरुआत भी होगी। यह यात्रा मतदाताओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से निकाली जाएगी। इन यात्राओं का समापन भी दिल्ली में होगा, जहां से राष्ट्रव्यापी अभियान को और गति मिलेगी।
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कांग्रेस का एसआईआर के खिलाफ बड़ा अभियान: 1 नवंबर को महारैली
Dainik Bihar Patrika संवाददाता6 अक्टूबर 2026 को 12:44 am बजे

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