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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह बात बिना किसी शक के स्थापित हो गई है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उन्होंने इसे भाजपा की मदद के लिए पद के दुरुपयोग का एक और सबूत बताया और कहा कि लोकतंत्र पर इस आपराधिक हमले में शामिल सभी लोग जवाबदेह ठहराए जाएंगे। राहुल गांधी ने अपने दावे के समर्थन में निर्वाचन आयोग की एक पुरानी प्रेस विज्ञप्ति की तस्वीर भी साझा की। इस बीच, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे का फैक्ट चेक करते हुए कहा है कि यह दावा भ्रामक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के लिए 24 जून 2025 को जारी आदेश सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को अपने फैसले में बरकरार रखा था। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी एक प्रेस नोट संख्या 120 के बिंदु 1(ईइ) में कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। यह फॉर्म विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को उसने मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने पर वे देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया। अदालत ने केंद्र, निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग तथा महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल निलंबित करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा तरीके से लिए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले सर्वसम्मति से होने चाहिए। पीठ ने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने के बाद चुनाव कौन कराएगा। इस पर विकास सिंह ने कहा कि दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं। अदालत ने कहा कि उसे पहले संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद आरोपों की जांच करनी होगी। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालत केवल अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकती। याचिका में दावा किया गया है कि अक्तूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। याचिका में फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
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