संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं 6 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे एक बैठक तय की थी, जिसे बाद में अदालत ने रद्द कर दिया। इस सूचना के मिलने पर समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया और सभी सदस्यों को इसकी जानकारी दी। चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को ईमेल के जरिए समिति के निदेशक को बैठक की जानकारी दी थी। उन्होंने इस मुद्दे को अनावश्यक तूल न देने की अपील की है, क्योंकि यह एक अनौपचारिक बातचीत थी। इससे पहले, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इस प्रस्तावित बैठक पर सवाल उठाते हुए इसे 'असांविधानिक' करार दिया था। सिब्बल के अनुसार, संसद से पारित विधेयक की सांविधानिकता पर फैसला अदालत करती है, न कि संसदीय समिति। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने कानूनी करियर में कभी भी ऐसी स्थिति नहीं सुनी, जहाँ कोई संसदीय समूह सुप्रीम कोर्ट में किसी कानून पर बैठक कर रहा हो और न्यायाधीशों को यह बता रहा हो कि कानून क्या है। पीपी चौधरी ने बताया कि समिति का उद्देश्य संविधान के 129वें संशोधन विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2024 की जांच करना है। इन विधेयकों में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान है। समिति विभिन्न हितधारकों से लगातार बातचीत कर रही है। चौधरी के अनुसार, जब समिति के सभी सदस्य यह मान लेंगे कि आवश्यक सभी पक्षों के बयान और राय सामने आ चुकी हैं, तब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया अभी चल रही है और वे हितधारकों को सुन रहे हैं। जब सभी सदस्य यह बताएंगे कि अब किसी और को सुनने की जरूरत नहीं है और सभी की राय सामने आ जाएगी, तब रिपोर्ट सौंपी जाएगी। डीएमके सांसद पी। विल्सन ने भी समिति को दिए अपने पत्र में इन मामलों का जिक्र किया था, जिसका चौधरी ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अतीत में भी इस तरह की बातचीत हुई है। चौधरी ने जोर देकर कहा कि इस मामले पर जरूरत से ज्यादा जोर देने या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले शिक्षा विधेयक समेत समिति के अन्य मामलों में भी ऐसी चर्चाओं के उदाहरण रहे हैं।
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जेपीसी अध्यक्ष बोले, सुप्रीम कोर्ट ने बैठक की थी रद्द
6 अक्टूबर 2026 को 12:44 am बजे



