भारत और स्विट्जरलैंड ने व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, रक्षा और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमलिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ व्यापक बातचीत की। विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता, जिसे टीईपीए भी कहते हैं, इस रिश्ते का प्रमुख आधार है। इस समझौते का लक्ष्य भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना है। दोनों पक्ष अब इस समझौते को जमीन पर लागू करने और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सिबी जॉर्ज ने कहा कि इस दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। भारत में 340 से ज्यादा स्विस कंपनियां मौजूद हैं, जिनमें सहायक कंपनियां, संयुक्त उद्यम और दो संपर्क कार्यालय शामिल हैं। करीब 110 स्विस कंपनियों ने भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं, जबकि 30 कंपनियां यहां अनुसंधान एवं विकास केंद्र चला रही हैं। इसके अलावा, 74 कंपनियां भारत को दूसरे बाजारों के लिए निर्यात केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। सिबी जॉर्ज के मुताबिक, स्विट्जरलैंड भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। भारत में स्विट्जरलैंड का अब तक 11 अरब डॉलर से अधिक का निवेश बताया गया है। स्विस कंपनियां दवा, रसायन, सटीक इंजीनियरिंग, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। करीब 340 स्विस कंपनियों की मौजूदगी इस कारोबारी रिश्ते का एक बड़ा आधार है। दोनों नेताओं ने इस मजबूत कारोबारी संबंध को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। यह भी स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध केवल भारत में स्विस कंपनियों के विस्तार तक सीमित नहीं हैं। भारतीय कंपनियां भी स्विट्जरलैंड को अपने कारोबार और वैश्विक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। पिछले कई वर्षों में स्विट्जरलैंड में भारतीय निवेश करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है। स्विट्जरलैंड जून 2027 में जिनेवा में एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
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भारत-स्विट्जरलैंड ने बढ़ाया सहयोग, निवेश-रोजगार पर जोर
6 अक्टूबर 2026 को 12:44 am बजे

भारत-स्विट्जरलैंड ने बढ़ाया सहयोग, निवेश-रोजगार पर जोर
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