सह-पायलट के हमले को कैप्टन ने किया नाकाम
बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उड़ान के दौरान सह- पायलट द्वारा कैप्टन पर धारदार वस्तु से हमला और विमान को तेजी से नीचे ले जाने की कोशिश, एक ऐसी भयावह स्थिति थी जिससे यात्रियों की जान बाल-बाल बची। कैप्टन स्मित की सूझबूझ और बहादुरी ने न केवल उन्हें बचाया, बल्कि विमान में सवार 174 यात्रियों को भी एक बड़े हादसे का शिकार होने से रोक लिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कैप्टन स्मित ने बेहोश होने से पहले कॉकपिट का दरवाजा खोलकर स्थिति को नियंत्रण में लाने का मार्ग प्रशस्त किया। यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि आतंकवाद का खतरा आज भी कितना वास्तविक है, भले ही दुनिया भर में इसके खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हों। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को अपहृत विमानों के जरिए हुए हमलों की त्रासदी को दुनिया आज भी भूली नहीं है। उस घटना ने विमानन सुरक्षा के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण को हमेशा के लिए बदल दिया था। ऐसे में, यह सोचना भी भयावह है कि अगर उड़ान के दौरान सह-पायलट ही छिपा हुआ आतंकी निकले, तो कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। यह घटना इस चिंता को और गहरा करती है कि विमान में हल्की-सी जोखिम पैदा करने वाली वस्तु ले जाने पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद, सह-पायलट घातक हथियार लेकर कैसे विमान में घुसने में कामयाब रहा। इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस घटना में आरोपी सह-पायलट के साथ कोई अन्य लोग भी शामिल थे और क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था। विमान में सुरक्षा की यह चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए, यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर सुरक्षा में कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। इस घटना ने विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल की खामियों को उजागर किया है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। कैप्टन स्मित मछार ने जिस तरह की जटिल और खतरनाक स्थिति में अपनी हिम्मत, कर्तव्यनिष्ठा और बहादुरी का परिचय दिया, वह अविश्वसनीय है। हमलावर सह-पायलट का सामना करते हुए, घायल अवस्था में भी उन्होंने अपने विवेक का साथ नहीं छोड़ा।



