इस साल महालक्ष्मी पूजा का पर्व 3 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार, इस बार अष्टमी श्राद्ध के साथ महालक्ष्मी पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग पितृपक्ष के दौरान आता है, जब पितरों के तर्पण के साथ धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का भी अवसर मिलता है। इस दिन गज लक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसे महालक्ष्मी पूजा भी कहते हैं। माना जाता है कि विधि-विधान से गजलक्ष्मी पूजा करने से जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। शुक्रवार का दिन होने के कारण यह पूजा और भी फलदायी साबित हो सकती है, क्योंकि शुक्रवार लक्ष्मीजी को अत्यंत प्रिय है। गजलक्ष्मी पूजा माता गजलक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाकर की जाती है। इसके बाद रोली, अक्षत (चावल), हल्दी और कुमकुम का लेप लगाया जाता है। देवी लक्ष्मी को कमल या गुलाब के फूल अर्पित किए जाने चाहिए। महालक्ष्मी पूजन में 16 वस्तुओं का विशेष महत्व है, इसलिए उन्हें 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करना फलदायी माना जाता है। गजलक्ष्मीजी को सफेद मिठाई का भोग लगाना शुभ होता है। इन सभी विधियों के बाद देवी की आरती की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि महालक्ष्मी पूजा का उद्यापन करने के बाद कलश विसर्जन शुभ मुहूर्तों में ही करना चाहिए। देवी लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए हवन भी किया जा सकता है। हाथी पर विराजमान लक्ष्मीजी की विधि-विधान से पूजा करने का भी विधान है, जिससे भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है। पितृपक्ष में अष्टमी तिथि को गजलक्ष्मी पूजा का विधान है। यह पूजा परिवार में सुख-समृद्धि लाने में सहायक होती है।
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महालक्ष्मी पूजा आज: अष्टमी श्राद्ध संग बना विशेष संयोग
6 अक्टूबर 2026 को 12:44 am बजे

महालक्ष्मी पूजा आज: अष्टमी श्राद्ध संग बना विशेष संयोग
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