सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नागरिकों के मताधिकार पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिसके तहत व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो जाएं, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का सीधा उल्लंघन होगी। जस्टिस भुइयां नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में 19वें जस्टिस बीआर साहनी स्मारक स्पर्धा के बाद छात्रों को संबोधित कर रहे थे, जहाँ उन्होंने एसआईआर पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी व्यवस्था भारत के संवैधानिक ढांचे के विपरीत है और ऐसी प्रथाओं को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस भुइयां ने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता - एक जिसे मतदान का अधिकार हो और दूसरा जिसे यह अधिकार प्राप्त न हो। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रियाओं को किसी भी दलील के माध्यम से उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कुलपति श्रीकृष्ण देव राव की भी तारीफ की। हालांकि, जस्टिस भुइयां ने अपने भाषण के दौरान नालसार के छात्रों और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत के निमंत्रण को लेकर हुए विवाद का सीधे तौर पर कोई जिक्र नहीं किया। गौरतलब है कि इस विवाद के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने छात्रों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सुनाया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। एसआईआर पर जस्टिस भुइयां की तीखी टिप्पणी हैदराबाद से आई है।
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मताधिकार छीनने वाली प्रक्रिया असंवैधानिक: जस्टिस भुइयां
6 अक्टूबर 2026 को 12:44 am बजे



