सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या कामकाज रोकने की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया, चुनाव आयोग से जवाब मांगा है
चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज के तरीके को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अंतरिम रूप से पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग पर तत्काल कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिकाओं पर सुनवाई किया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने ऐसे अधिकारों का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल किया, जो कानून के मुताबिक पूरे चुनाव आयोग के हैं। याचिका में ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को चुनौती दी गई है, जिन्हें कथित तौर पर दोनों अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना किया गया। याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग में मतभेद होने पर बहुमत का फैसला लागू होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया में निर्धारित सामूहिक व्यवस्था का पालन नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कई फैसले एकतरफा लिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सीईसी के खिलाफ कोई अंतरिम कार्रवाई नहीं की है और पहले निर्वाचन आयोग का पक्ष जानने का फैसला किया है। याचिका में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में पूर्वजों की जानकारी और पिछले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से लिंक जैसी शर्तें सॉफ्टवेयर के जरिए जोड़ी गईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल किया, जो कानून के तहत पूरे आयोग के अधिकार हैं। यह भी आरोप है कि सॉफ्टवेयर में बदलाव और दिशानिर्देशों को दोनों अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना लागू किया गया। एक अखबार की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि किसी संस्था में विचारों और टिप्पणियों में अंतर सामान्य है और उसके सभी आदेश कानूनी रूप से वैध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट अब निर्वाचन आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों की जांच करेगा। याचिका में गोवा और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। गोवा में 97 पात्र मतदाताओं को बहाल करने के निर्देश के बावजूद सॉफ्टवेयर में उन्हें बहाल करने की सुविधा नहीं होने का आरोप लगाया गया। पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख से अधिक अपीलों का भी जिक्र है।




