दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड के मध्य विद्यालय सौढ़ भरतखण्ड में विश्व शिक्षक दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का अध्यक्षता प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान और मंच संचालन शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने किया। प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान ने कहा कि विश्व शिक्षक दिवस की शुरुआत वर्ष 1994 में हुई थी। 5 अक्टूबर की तारीख इसलिए चुनी गई, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1966 में यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की बैठक में शिक्षकों की स्थिति से संबंधित सिफारिश को अपनाया गया था।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने कहा कि विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को पूरे दुनिया में बड़े ही आदर और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन उन शिक्षक को समर्पित है जो देश और समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सभ्यता में गुरु को ज्ञान, संस्कार जीवनदृष्टि का मार्गदर्शक माना गया है।शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने विश्व शिक्षक दिवस की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व शिक्षक दिवस को पहली बार 5 अक्टूबर 1994 को मनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने इसकी पहल की थी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षकों के योगदान को पहचान देना और उनके अधिकारों व सम्मान की रक्षा करना था। शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने विश्व शिक्षक दिवस का महत्व के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि सफलता का जब, शीर्षक लिखूंगा। सबसे अहम तब, शिक्षक लिखूंगा। उन्होंने बताया कि विश्व शिक्षक दिवस हमें याद दिलाता है कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और शिक्षक उस रीढ़ को मजबूत करने वाले स्तंभ होते हैं। यह दिन पूरे विश्व के शिक्षकों के समर्पण, मेहनत और समाज के प्रति उनकी सेवा के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि प्राचीन भारत की गुरुकुल व्यवस्था में विद्यार्थी गुरु के सान्निध्य में शिक्षा प्राप्त करते थे। भारतीय शिक्षा परंपरा में तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों का उल्लेख आज भी गौरव के साथ लिया जाता है। शिक्षक निरंजन कुमार ने बताया कि शिक्षक मार्गदर्शक, प्रेरक और परामर्शदाता की भूमिका भी निभाता है। तकनीक के दौर में शिक्षक की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। डिजिटल युग ने शिक्षक की भूमिका को खत्म नहीं किया, बल्कि उसे और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यहीं शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।मौके पर प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान, शिक्षक सिद्धार्थ कुमार, निरंजन कुमार, रामविनोद साह, रामलाल पंडित, उत्कर्ष कुमार, सार्थक कुमार, कृष्णा कुमार,आराधना कुमारी, शिवानी कुमारी, साक्षी कुमारी, अंजली कुमारी, महक कुमारी, राजनंदनी कुमारी, अनुपम कुमारी, संध्या कुमारी, बन्दों कुमारी, निक्की कुमारी, हर्ष राज, रणवीर कुमार, आदित्य कुमार समेत सैकड़ों छात्र और छात्राएं मौजूद थे।
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मध्य विद्यालय सौढ़ भरतखण्ड में विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर बोले शिक्षक सिद्धार्थ कुमार।भारत में गुरु का स्थान सदियों से विशेष रहा है।
दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया6 अक्टूबर 2026 को 7:57 am बजे

मध्य विद्यालय सौढ़ भरतखण्ड में विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर बोले शिक्षक सिद्धार्थ कुमार।भारत में गुरु का स्थान सदियों से विशेष रहा है।
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